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दिल्ली विश्वविद्यालय के DUSU चुनाव में ABVP ने तीन मुख्य पद जीत कर उपराष्ट्रपति यश दाबास को चुना, स्वतंत्र दीपांशु शौकीन ने उपाध्यक्ष का पद हासिल किया

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ (DUSU) के 2026 के चुनाव परिणाम सामने आए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने चार मुख्य पदों में से तीन जीत कर छात्रों के प्रतिनिधित्व में अपनी पकड़ मजबूत की। ABVP के यश दाबास को उपराष्ट्रपति के पद पर चुना गया, जबकि स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शौकीन को उपाध्यक्ष (Vice‑President) का सीट मिली। इस परिणाम ने विश्वविद्यालय में राजनीतिक गतिशीलता को नई दिशा दी है।

परिणामों की घोषणा से पहले कई सप्ताहों तक कैंपस में विभिन्न पार्टीओं ने अपना मंच तैयार किया था। राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने अपनी प्रमुख अभ्यर्थी विजय शंकर मीना को राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन दिया, जबकि ABVP ने युवा वाक्यात्मकता पर बल देते हुए अपने उम्मीदवारों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया। इस बीच, स्वतंत्र उम्मीदवारों ने भी अपनी नीतियों और विचारधाराओं को स्पष्ट करने के लिए मंच तैयार किया। इस चुनाव में कुल 1.2 लाख छात्रों ने मतदान किया, जो पिछले चुनावों की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक था।

राष्ट्रपति पद के मुकाबले में यश दाबास ने 24,576 वोट प्राप्त करके विजय शंकर मीना को 22,523 वोटों से पीछे छोड़ दिया। मतदान के बाद कई छात्रों ने कहा कि दाबास की लोकप्रियता उनके कैंपस में सक्रिय कार्यों और नीतियों के कारण है। दूसरी ओर, मीना की हार के पीछे कुछ छात्र यह मानते हैं कि NSUI के प्रचार में कमियों ने प्रभाव डाला। इस मुकाबले के दौरान विभिन्न छात्र समूहों ने मतदान के बाद भी शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखा।

ABVP ने सचिव पद पर रिया चावड़ी को चुना, जिन्होंने 20,112 वोटों के साथ प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ दिया। चावड़ी की जीत को कई छात्र समूहों ने युवा महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का प्रतीक माना। संयुक्त सचिव के पद पर लक्षण राज सिंह को 19,845 वोटों से जीत हासिल हुई। सिंह की जीत को उनके सामाजिक कार्यों और छात्र मुद्दों पर स्पष्ट रुख को सराहा गया। इस दौरान स्वतंत्र उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने 9,734 वोटों के साथ उपाध्यक्ष पद जीतकर आश्चर्यजनक परिणाम दिया।

परिणामों की घोषणा के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में प्रतिक्रिया देखी गई। कई प्रोफेसरों ने कहा कि छात्र राजनीति का यह बदलाव विश्वविद्यालय की शैक्षिक और सामाजिक नीतियों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। वहीं, छात्र संघ के कुछ वरिष्ठ सदस्य ने यह संकेत दिया कि नई टीम के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी। कुछ छात्र समूहों ने भी यह आशा जताई कि नई प्रशासनिक टीम छात्र समस्याओं को तेज़ी से हल करेगी।

ABVP के प्रतिनिधियों ने अपनी जीत को छात्रों की असली आवाज़ कहा। दाबास ने अपने चुनावी भाषण में कहा कि वह शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा के मुद्दों को प्राथमिकता देंगे। चावड़ी ने अपने कार्यकाल में महिलाओं की सुरक्षा और समान अवसरों को बढ़ावा देने का वादा किया। लक्षण राज सिंह ने सामाजिक समानता और पर्यावरणीय जागरूकता पर जोर दिया। इन बयानों ने छात्रों के बीच उत्साह उत्पन्न किया।

विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त कीं। NSUI ने कहा कि वे परिणामों को स्वीकार कर रहे हैं परन्तु भविष्य में छात्र मुद्दों को बेहतर ढंग से उठाने का संकल्प लिया है। स्वतंत्र उम्मीदवारों के समूह ने कहा कि शौकीन की जीत एक संकेत है कि छात्र अब अधिक विकल्पों की ओर झुक रहे हैं। इस बीच, कुछ छात्र संगठनों ने परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पुनःगणना की मांग की।

राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि ABVP की जीत दिल्ली विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय राजनीति के प्रवाह को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने बताया कि ABVP ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी रणनीति को स्थानीय स्तर पर अनुकूलित किया है, जिससे युवा वर्ग में उनका समर्थन बढ़ा। आर्थिक विशेषज्ञों ने भी बताया कि छात्र संघ के निर्णयों का विश्वविद्यालय के बजट और संसाधन वितरण पर प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर छात्रवृत्ति और इंटर्नशिप कार्यक्रमों में।

समाजिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस चुनाव ने छात्रों की सहभागिता में वृद्धि को दर्शाया। कई सामाजिक कार्यकर्ता इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि छात्र राजनीति को शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक चेतना का भी हिस्सा माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई टीम को सामाजिक मुद्दों जैसे लैंगिक समानता, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

भविष्य में इस नई छात्र सरकार की नीतियों का प्रभाव विश्वविद्यालय की शैक्षिक गुणवत्ता और छात्र संतुष्टि पर स्पष्ट रूप से देखना संभव होगा। यदि ABVP

Updated: September 19, 2026


ABVP clinched three of the four top posts in the 2026 DUSU elections, with Yash Dabas as president and independent Deepanshu Shaqueen as vice‑president, reflecting a shift in campus politics amid a 15% surge in voter turnout. The new leadership pledges focus on education, employment, safety and gender equity, while rivals acknowledge the result and call for greater transparency.

The election saw a higher voter turnout, indicating increased student participation. The results will shape the university’s student‑representation agenda and influence policy decisions affecting campus services and resources.

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