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मंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में विश्वकर्मा पूजा के प्रसाद से 17 छात्राएं अस्पताल में भर्ती, खाद्य विषाक्तता की संभावना पर जांच जारी.

मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में विश्वकर्मा पूजा के उपरांत्र आयोजित प्रसाद समारोह के बाद दो दर्जन से अधिक छात्राओं को अचानक उलझन, मतली और सिरदर्द की शिकायतों से ग्रसित होते देखा गया। स्थानीय समाचार स्रोतों के अनुसार, शुक्रवार की शाम करीब सत्रह छात्राएं अस्पताल में भर्ती हुईं, जबकि बाकी छात्राओं को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेजा गया। इस घटना ने कैंपस में तीव्र घबराहट पैदा कर दी और स्थानीय प्रशासन को आपातकालीन कार्रवाई करने के लिए बाध्य किया।

विश्वकर्मा पूजा के दौरान आयोजित प्रसाद में मुख्य रूप से मीठे स्नैक्स, फल और शर्करा युक्त पेय पदार्थ शामिल थे। यह रस्म सामान्यतः छात्रों और कर्मचारियों के बीच सामाजिक बंधन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित की जाती है। इस वर्ष की पूजा में लगभग दो हजार लोगों ने भाग लिया, जिससे बड़े पैमाने पर भोजन की व्यवस्था की गई थी।

हालांकि, स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने पहले से ही इस प्रकार के बड़े इवेंट में खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश जारी किया था। कॉलेज प्रशासन ने कहा था कि सभी व्यंजनों को प्रमाणित कैटरर द्वारा तैयार किया गया है और स्वास्थ्य निरीक्षण के बाद ही परोसे जाएंगे। फिर भी, इस प्रसाद में संभावित दूषित घटक या असंगत भंडारण प्रक्रिया की जांच अभी भी जारी है।

प्रसाद सेवन के तुरंत बाद कई छात्राओं को पेट में दर्द, उल्टी और हल्का बुखार हो गया। मुंगेर सदर अस्पताल में पहुँचते ही रोगियों को त्वरित शारीरिक जांच, रक्त परीक्षण और उल्टी के नमूनों की जाँच की गई। प्रारंभिक रिपोर्टों ने संकेत दिया कि कुछ रोगियों में खाद्य विषाक्तता के लक्षण स्पष्ट थे, जबकि अन्य में संक्रमणजन्य कारणों की संभावना बनी हुई है।

अस्पताल के आपातकालीन विभाग के प्रमुख डॉक्टर ने बताया कि अधिकांश छात्रों का लक्षण हल्का था और उन्हें मौखिक रिहाइड्रेशन समाधान तथा एंटीहिस्टामिन दवाओं से उपचार किया गया। 15वें छात्रा साक्षी कुमारी को स्थिति अधिक गंभीर होने के कारण 24 घंटे के लिए भर्ती किया गया। उनकी स्थिति को स्थिर बताया गया, लेकिन डॉक्टरों ने सतर्कता बरतने की सलाह दी।

कॉलेज के प्रधानाचार्य ने तुरंत एक आपातकालीन मीटिंग बुलाई, जिसमें प्रबंधन, छात्र संघ और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया। मीटिंग में तत्काल प्रसाद वितरण को रोकने और प्रभावित छात्रों के उपचार पर चर्चा की गई। प्रशासन ने कहा कि भविष्य में खाद्य सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू किया जाएगा और किसी भी अनियमितता की रिपोर्ट तुरंत की जाएगी।

विपरीत रूप से, कुछ छात्राओं ने बताया कि उन्होंने प्रसाद के बाद ही तुरंत लक्षण महसूस नहीं किए, बल्कि दो-तीन घंटे बाद अचानक अस्वस्थता का सामना किया। इस तथ्य से यह संकेत मिलता है कि विषाक्तता की प्रक्रिया में समय अंतराल हो सकता है, जिससे संक्रमण के स्रोत की पहचान जटिल हो रही है।

कॉलिंग सेंटर में रिपोर्ट दर्ज करने के बाद, मुंगेर पुलिस ने एक जांच दल स्थापित किया। इस दल का कार्यस्थल पर खाद्य सामग्री के स्रोत, वितरण प्रक्रिया और संभावित नियामक उल्लंघनों की जाँच करना है। पुलिस ने कहा कि यदि किसी भी तरह की लापरवाही सिद्ध होती है तो कड़े कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

छात्र संघ के प्रमुख ने इस घटना को भोजन सुरक्षा के प्रति लापरवाही कहा और कॉलेज प्रशासन से तत्काल सुधारात्मक कदम मांगे। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कई छात्रों ने पहले भी समान कार्यक्रमों में अस्थायी असहजता की शिकायतें की थीं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिला था। इस पर कॉलेज ने कहा कि यह पहला गंभीर मामला है और आगे की जाँच के परिणामों के आधार पर नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि इस प्रकार की बड़े पैमाने पर आयोजित भोज्य कार्यक्रमों में अक्सर कच्चे माल की गुणवत्ता, तापमान नियंत्रण और स्वच्छता प्रक्रियाओं में खामियां रहती हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में सभी शैक्षणिक संस्थानों को स्वास्थ्य विभाग की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस घटना से कॉलेज की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है, जिससे छात्र प्रवाह और प्रायोजन में गिर

Updated: September 19, 2026

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